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भूगर्भ चैत्यालय



Shri Digambar Jain Atishaya Kshetra, Sanghi Ji Jain Mandir Bhugarbh Chaityalaya भूगर्भ चैत्यालय 2017, संघी जी मंदिर, भूगर्भ स्थितः यक्ष रक्षित जिनबिम्ब अमृत सिद्धि दर्शन महोत्सव सांगानेर जयपुर (राजस्थान)

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महत्वपूर्ण सूचना कृपया ध्यान देवें दिनांक 19 एवं 20 के लिए स्वस्ति कलश, परमेष्ठी कलश एवं मंगल कलश की बुकिंग न करें । इन कलशों द्वारा अभिषेक दिनांक 21 से ही प्रारंभ किया जाएगा ।

कृपया ध्यान देवें

ऑनलाइन कलश बुकिंग के लिए आप सबसे पहले अपना फॉर्म भर देवें ।

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उस रजिस्ट्रेशन नंबर को आपको आगे की प्रक्रिया हेतु संभाल कर रखना होगा ।

रजिस्ट्रेशन के 24 घंटे पश्चात आप हमारे कलश आवंटन समिति में संपर्क करके अपना रजिस्ट्रेशन को कन्फर्म जरूर कराएं । एवं अपने सहयोग राशी को जमा कर उसकी जानकारी हेतु बात करें एवं नोट कर देवें । ताकी आपका रजिस्ट्रेशन फाइनल हो सके ।

Some Information about Online Booking (ऑनलाइन बुकिंग हेतु कुछ जानकारी) – Information about Bank Account Numbers (बैंक एकाउंट की जानकारी)

Account Name – SHREE DIGAMBER JAIN ATISHAYA KSHETRA MANDIR SANGHIJI

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Bank Name – HDFC Bank

Account number – 50100046655211

IFSC Code – HDFC0000987

BRANCH – SFS MANSAROVAR

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Bank Name – SBI

Account number – 10160627669

IFSC Code – SBIN0007095

BRANCH – SANGANER

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कलश आवंटन समिति संपर्क सूत्र 

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ANURAG JAIN – 7014865774  (Whatsapp Number)

ASHISH KASLIWAL – 7014311036 

JAI JAIN – 7877775920 

SHUBHAM JAIN – 7221999003

Sudheer Kasliwal – 8529712546

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07014865774 , 7014311036

कलश की जानकारी (How to Book Kalash Online)

  • 1. You can also book your Punya Kalash by commenting in the comment box section by going here: Kalash Online Booking.
  • 2. You have to enter Your Number, Your Address, Type of Kalash which you want to book with Your Own Contact Number for the booking of kalash online.
  • 3. We will comment back after confirming your Kalash Booking on your particular comment.
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सहयोग कलश का नाम सुविधाएं
सुरक्षित आचार्य विद्यासागर स्वर्ण कलश सुरक्षित
100 कलश 11 श्रीफल मुनि पुंगव श्री सुधासागर रिद्धि सिद्धि कलश 5 कमरे 7 दिन आवास 21 व्यक्ति
51 कलश 51 श्रीफल आदीश्वर ब्रह्म कलश 3 कमरे 7 दिन आवास 11 व्यक्ति
21 कलश 21 श्रीफल सर्वोदय तीर्थ कलश 2 कमरे 3 दिन आवास 5 व्यक्ति
11 कलश 11 श्रीफल सर्वार्थ अमृत सिद्धि कलश 1 कमरा 1 दिन आवास 5 व्यक्ति
5 कलश 51 श्रीफल अमृत सिद्धि कलश 1 कमरा 1 दिन आवास 3 व्यक्ति
1 कलश 11 श्रीफल सर्वार्थ कलश 1 कमरा 1 दिन आवास 2 व्यक्ति
51 श्रीफल सर्व औषधि कलश आवास सुविधा सशुल्क 1 व्यक्ति कलश करेगा
21 श्रीफल स्वस्ति कलश आवास सुविधा सशुल्क 1 व्यक्ति कलश करेगा
11 श्रीफल परमेष्ठी कलश आवास सुविधा सशुल्क 1 व्यक्ति कलश करेगा
5100/- मंगल कलश आवास सुविधा सशुल्क 1 व्यक्ति कलश करेगा

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History of Bhugarbh Chaityalaya in Hindi

 

हजारों साल की ऐतिहासिकता का साक्षी यह भूगर्भ स्थित जिनालय है । इसमें से अभी तक जितनी प्रतिमाएं निकाली गई हैं उनमें किसी पर भी प्रशस्ति नही है । मात्रा एक प्रतिमा पर संवत 7 उत्कीर्ण है । पूर्वकथित तल्ले वाले मंदिर का नाम तो कथन परंपरा में है , लेकिन कहीं भी किसी भी लेखक ने इस चैत्यालय एवं जिन बिम्बों का उल्लेख नही किया । हो सकता है इस जिनालय को संघी जी ने उस प्राचीन तल्ले वाले मंदिर के तल्ले को बंद करके ऊपर वह विशाल मंदिर बना दिया हो । जो कुछ भी हो , इसके ऐतिहासिकता इतिहास के गर्भ से अभी तक प्रसूत नही हुई , जनश्रुति का जरूर विषय बना रहा ।

20 वीं सदी की प्रथमाचार्य चारित्रचक्रवर्ती परम पूज्य आचार्य शांतिसागर महाराज का संघ सहित यहां पदार्पण सन 1933 की मंगसिर बदी तेरस को हुआ । आचार्य शांतिसागर जी महाराज ने आदिनाथ बाबा के दर्शन कर अलौकिक शांति का अनुभव किया तथा कहा कि यह चतुर्थकालीन महा अतिशयकारी प्रतिमा है । आप लोग इस मंदिर का जीर्णोद्धार करो, पूजन पाठ कर जीवन को धन्य बनाओ ।

एक दिन सांगानेर के किसी वृद्ध ने महाराज से कहा कि महाराज इस मंदिर के नीचे कोई तलघर हैं तथा उनमें रत्नमयी जिन प्रतिमाएं हैं , ऐसा हमारी पूर्वज कहा करते थे। महाराज ने कहा कि ऐसी बातों पर अधिक विश्वास नही करना चाहिए । लेकिन आकस्मिक रूप से उसी रात्री को ब्रह्म मुर्हूत में यक्ष ने महाराज को स्वप्न दिया । प्रातःकाल उठकर महाराज ने कहा कि आप लोगों द्वारा कही गयी जनश्रुति झूठी नही है , मुझे स्वप्न में भूगर्भ स्थित जिनालय के दर्शन हुए हैं । तदनुसार महाराज ने पूजा वाले कमरे में गुफाद्वार पर कुछ दिन तक जाप किया । मंगसिर सऊदी दशमी को प्रातःकाल 7:30 बजे गुफा में अकेले ही प्रवेश किया । 20 से 25 मिनट बाद महाराज श्री सम्पूर्ण चैत्यालय को लेकर गुफा द्वार पर आ गए । बड़ी तादाद में बाहर मंडप में जन समूह एकत्रित था सैकड़ों कलशों से अभिषेक हुआ ।

उस समय आचार्य शांतिसागर जी महाराज ने अपनी उपदेश में कहा कि यह मंदिर सात मंजिला है । पांच मंजिला नीचे है और दो मंजिला ऊपर है । अंतिम दो तल्लों में कोई नहीं जा सकता है । मध्य की पांच मंजिल में यह अलौकिक रत्नमयी चैत्यालय विराजमान है। उस समय जनता ने पहली बार दर्शन किये थे ।

उसके बाद अनेक आचार्य मुनि पधारे लेकिन चैत्यालय निकालने का निमित्त नही बन पाया । 38 साल बाद जून सन 1971 में आचार्य देशभूषण जी महाराज ने इस चैत्यालय को तीन दिन के लिए निकाला । बड़ी धर्म प्रभावना हुई ।संकल्पानुसार चैत्यालय को भूगर्भ में विराजमान करने में देर हो गई । समय पूर्ण होते ही चारों तरफ गुफा से लेकर स्टेज तक असंख्यात कीड़े मंदिर में , पांडाल में भर गए । आचार्य महाराज ने बताया हमने चैत्यालय वापिस विराजमान करने का समय 8 बजे का दिया था अब 10 बज गए हैं इसीलिए उपसर्ग हो रहा है ।

इसके बाद सन 1987 में आचार्य विमलसागर जी महाराज ने तथा 10 मई सन 1992 ई को आचार्य कुंथुसागर जी महाराज ने इस भव्य एवं अलौकिक चैत्यालय के जनता को दर्शन कराए ।

इसके बाद इस युग के महातपस्वी संत शिरोमणि आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के परम शिष्य , तीर्थ क्षेत्र उद्धारक , आद्यात्मिक संत मुनि पुंगव श्री सुधासागर जी महाराज ससंघ का पदार्पण सांगानेर में हुआ । मुनि श्री कुछ घंटों का विचार करके ही यहां आए थे लेकिन भगवान आदिनाथ की प्रतिमा को देखकर बहुत ही आनंदित हुए । सारे मुनि संघ को अलौकिक शांति मिली । अतः पूरा मुनि संघ 46 दिन तक यहां रुका । बहुत धर्म प्राभावना हुई । मुनि श्री अपने प्रवचन में इस क्षेत्र की महिमा का वर्णन करते थे ।

मुनि श्री वास्तुशास्त्र के ज्ञाता हैं । अतः इस संघी जी के मंदिर के वास्तु दोष हटाकर जीर्णोद्धार की प्रेरणा दी । तदनुसार जीर्णोद्धार हुआ तथा मंदिर को नया भव्य रूप भी दिया जा रहा है । मुनि श्री के बताए अनुसार वास्तुदोष हटने के बाद तो यह क्षेत्र दिन दूना रात चौगुना लोगों की श्रद्धा का केंद्र बनता गया । नाना प्रकार के अतिषयों से लोग लाभान्वित होने लगे ।

दिनांक 12 जून को समाज एवं कमेटी के विशेष आग्रह पर मुनि श्री प्रातः काल भूगर्भ स्थित यक्ष रक्षित चैत्यालय को तीन दिन के लिए निकाल कर लाये । मुनि श्री ने प्रवेश करने से पहले सारे नियमों की जानकारी की । आचार्य शांतिसागर जी महाराज के बताए सारे नियमों को अच्छी तरंग जान लेने के बाद ही चैत्यालय निकालने का आशीर्वाद दिया । उन्ही नियमों को गुरु आज्ञा मानकर , स्वीकार कर, गुफा में प्रवेश किया । प्रवेश करने के पूर्व आपने सात दिन तक ब्रह्म मुर्हूत में गुफा के द्वार पर बैठ कर जाप किया । सातवें दिन 7:30 बजे आपने गुफा में प्रवेश किया । एक घंटे गुफा में रहने के बाद मुनि श्री प्रसन्न मुद्रा में चैत्यालाय लेकर गुफा के बाहर आये । चारों ओर जय जयकार से आकाश गुंजायमान हो गया ।

इस बार पुनः 18 साल के बाद परम पूज्य संत शिरोमणि आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के परम आशीर्वाद से जगत पूज्य तीर्थ जीर्णोद्धारक वास्तुविज्ञ महा अतिशयकारी मुनि पुंगव श्री सुधासागर जी महाराज के द्वारा भूगर्भ से अति प्राचीन यक्ष रक्षित जिन चैत्यालय निकाला जाएगा । जिसकी घोषणा पूज्य मुनि श्री द्वारा 26 मई 2017 को सांगानेर के आदिनाथ बाबा के चरणों मे की गई ।

इस चैत्यालय के निकालने की तिथि पूज्य मुनि श्री द्वारा 19 जून से 25 जून 2017 तक रखी गई है । आप भी इस महान अतिशय का पुण्य लाभ लेकर अपने जीवन को धन्य करें ।

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